अभिव्यक्ति की अनुभूति / शब्दों की व्यंजना / अक्षरों का अंकन / वाक्यों का विन्यास / रचना की सार्थकता / होगी सफल जब कभी / हम झांकेंगे अपने भीतर
शनिवार, 30 मार्च 2013
बुआ जी का बुलंद हौंसला
गुरुवार, 28 फ़रवरी 2013
अंजार, कच्छ स्थित मेरे देवस्थान
गुजरात के सरहदी जिले कच्छ के ऐतिहासिक शहर और मेरी जन्म भूमि "अंजार" में कोडराणी कुटुंब का यह देवस्थान है। मैं भी कोडराणी परिवार का एक सदस्य हूँ। कोडराणी कुटुंब के पूज्य दादा श्री खेतरपाण और कुलदेवी माँ बूटभवानी इस देवस्थान में प्रतिष्ठापित हैं। यहाँ प्रतिदिन पूजा अर्चना के अलावा हर साल वसंत पंचमी को विशेष वार्षिक पूजन महोत्सव (पेढ़ी) आयोजित किया जाता है, जो पिछले 26 साल से जारी है। देश विदेश में निवासरत कोडराणी कुटुंब के सदस्य जन इसमें सम्मिलित होते हैं। मैं भी इसमें सपत्नीक शामिल हुआ। यहाँ वसंत पंचमी को शाम छह बजे से हवन के साथ पूजा अर्चना प्रारम्भ होती है। फिर रात को महाप्रसाद के वितरण के बाद इसका समापन होता है। इस साल के पूजन यजमान राजू भाई कोडराणी (अंजार लोहाणा महाजन ट्रस्ट के अध्यक्ष और अंजार नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष) थे।
मंगलवार, 1 जनवरी 2013
मंगलवार, 11 दिसंबर 2012
दिलीप कुमार के साथ यादगार लम्हें
अभिनय सम्राट दिलीप साहब को जन्म दिन की बधाई। वर्ष 1995 में जी सिनेमा में प्रसारित धारावाहिक "अनबन" के लिए दिलीप साहब का पहला विस्तृत साक्षात्कार मुंबई के पाली हिल स्थित उनके बंगले में हमने दिन भर फिल्माया था। उसी अवसर की यह यादगार तस्वीर, जो मेरे लिए धरोहर सदृश्य है। तस्वीर में दिलीप साहब के साथ लेखक- मुख्य सहायक निर्देशक बतौर मैं और निर्माता-निर्देशक संजू सिन्हा दृष्टिगोचर हो रहे हैं।
मायापुरी में दिलीप कुमार के साथ यादगार तस्वीर
वर्ष 1995 में टीवी चैनल "जी सिनेमा" में प्रसारित न्यूज सीरियल "अनबन" के लिए दिलीप कुमार का पहला विस्तृत साक्षात्कार मुंबई के पाली हिल स्थित उनके बंगले में हमने दिन भर फिल्माया था। उसी अवसर की यह यादगार तस्वीर फिल्म साप्ताहिक "मायापुरी" में प्रकाशित हुई थी, जो मेरे लिए धरोहर सदृश्य है। तस्वीर में दिलीप साहब के साथ लेखक- मुख्य सहायक निर्देशक बतौर मैं, मेरे बॉस निर्माता-निर्देशक संजू सिन्हा सहित यूनिट के प्रमुख सदस्य दृष्टिगोचर हो रहे हैं।
शुक्रवार, 30 नवंबर 2012
सोशल साइट्स पर "जला सो अल्लाह"
मेरी पहली प्रकाशित किताब "जला सो अल्लाह" (संत जलाराम बापा की जीवन-कथा) को देश-विदेश में सुधि पाठकों द्वारा सराहे जाने पर आप सभी का ह्रदय से आभारी हूँ। इस किताब को मैंने निःशुल्क सोशल साइट्स पर भी उपलब्ध कराया है। इसके सभी चालीस अध्याय फेसबुक के अलावा ट्वीटर, गूगल प्लस, गूगल रीडर और मेरे ब्लॉग "बापा की बगिया" (दिनेश ठक्कर बापा डॉट ब्लॉग स्पॉट डॉट कॉम) के जरिये भी पढ़े जा सकते हैं। ब्लॉग "बापा की बगिया" में इस किताब को अब तक देश विदेश के ढाई हजार से ज्यादा लोगों ने इसे पढ़ा है।
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