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शनिवार, 25 जनवरी 2014

अंग प्रत्यंग पर राम नाम गुदवाने वाले रामनामियों का अनूठा समागम

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के ग्राम बिनौरी (धुर्वाकारी) में आयोजित तीन दिवसीय राम-राम बड़े भजन मेला अविस्मरणीय रहा। अंग प्रत्यंग पर राम नाम गुदवाए रामनामियों के इस अनूठे संत समागम के दौरान सतनामी समाज के हजारों श्रद्धालुओं ने मत्था टेक कर पूजा अर्चना की। रामनांमियों के ह्रदय स्पर्शकारी राम धुन-भजन से समूचा माहौल राममय हो गया था। 
12 से 14 जनवरी तक ग्राम बिनौरी की हर धड़कन हरिजन रामनामियों के नाम हो गई थी। रामनामी गुरू-गोसाइयों और भक्तों के अंग-प्रत्यंग पर सुई से किया हुआ राम नाम का अंकन, सिर पर सज्जित मोर पंखी बांस मुकुट, बदन पर लिपटा राम-राम लिखित सूती शाल, पैरों में बंधे घुंघरूओं की खनक, घुंघरू मंडित काष्ठ चौकों की ध्वनि और राम-राम के कर्णप्रिय लयात्मक उच्चारण से समूचा वातावरण राममय हो गया था। एक तरफ लोक शैली के मेले का आनंद, तो दूसरी तरफ रामनामियों का संत- समागम। दोनों ही छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और आस्था का प्रतिनिधित्व करते हैं। यहां न केवल बिलासपुर बल्कि जांजगीर, कोरबा, सरगुजा, रायगढ़, रायपुर आदि जिले के भी हजारों रामनामी इकट्ठे होकर राम के प्रति अपनी आस्था प्रकट की।   
अखिल भारतीय रामनामी महा सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष फिरतराम महिलांगे ने रामनामी भजन मेला का इतिहास बताते हुए कहा कि वर्ष 1910 में चारपारा के गौंटिया ने रामनाम भजन की शुरूआत की थी। फिर धीरे धीरे रामनामियों की संख्या बढ़ते गई। इनकी संख्या अब छह लाख हो गई है। अखंड राम नाम जपने के बाद राम-राम बड़े भजन मेला की शुरूआत ग्राम तिल्दा से हुई। अब तक 104 राम-राम  बड़े भजन मेले का आयोजन हो चुका है। तिल्दा, अखिल भारतीय रामनामी महासभा का केंद्र बन चुका है। रामनामियों की खूबियों के बारे में उन्होंने बताया कि रामनामी शुद्ध शाकाहारी होते हैं। वे सत्य वचन वाले होते हैं। वे समस्त इंद्रियों पर विजय प्राप्त कर शरीर के अंगों पर सुई से राम नाम का गोदना करवाते हैं। शुद्ध आचार, विचार और व्यवहार से राम नाम निरंतर जपते हैं। इससे जो सुख उन्हें मिलता है, वह अतुलनीय है। ऐसा सुख उन्हें और कहीं नहीं मिलता है। राम नाम का गोदना उनकी असल पहचान है। इसे देख कर लोग सहज ही राम राम कहते हैं। सतनामी हरिजन समाज की नई पीढ़ी शरीर पर अब राम नाम गुदवाने से परहेज क्यों करने लगी है? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि पीढ़ियों का अंतर आने और बदलते वक्त के कारण राम नाम गुदवाना बंद नहीं हुआ है, लेकिन कम जरूर हो गया है। पहले दस लोग राम नाम गुदवाते थे, अब दो लोग गुदवाते हैं। इसके बावजूद रामनामी पंथ से सरोकार और आस्था कम नहीं हुई है। हम रामनामी भजन बैठक-मेले में समाज के लोगों को शराब आदि व्यसन से दूर रहने प्रेरित करते हैं। साफ सुथरा जीवन जीने कहते हैं। बच्चों को शिक्षित करने पर जोर देते हैं। धार्मिक के साथ साथ सामाजिक कर्तव्य भी हम निभाते हैं।  
अनैतिक कार्य करने वालों को दी जाती है कड़ी सजा 
मेला समिति के अध्यक्ष राजेन्द्र धृतलहरे ने बताया कि इस राम राम बड़े भजन मेले में धार्मिक पक्ष के अलावा सिनेमा, सर्कस, झूले आदि मनोरंजन साधनों के लिए अनुमति जरूर रहती है। परन्तु असामाजिक और अनैतिक कामों पर सजा भी दी जाती है। शराब पीकर आने वाले को कड़ी सजा दी जाती है। उसे फौरन इलाके से बाहर कर दिया जाता है। मेले के समापन अवसर पर निःशुल्क भंडारा लगाया गया, जिसमें साफ सफाई पर खास ध्यान दिया जाता है। भंडारा से पूर्व स्थल की गोबर से लिपाई की गई थी, ताकि मक्खी मच्छर न आ सकें।   
मंदिर में केवल राम नाम की लिखावट 
गौरतलब है कि गांव में रामनामियों और राम-राम बड़े भजन (वार्षिक सम्मेलन) की मांग के लिए नारियल के साथ आवेदन पत्र दिए जाते हैं। जहाँ भजन बैठक होती है उस मंदिर में केवल राम नाम की लिखावट रहती है। राम की प्रतिमा नहीं रहती है। मंदिर के शिखर पर रामांकित श्वेत ध्वज हमेशा फहराता है। वाद्यरहित भजन-बैठक होती है। घुंघरूओं की झंकार के साथ रामधुन होती है। इसमें अनेक रामनामी सपरिवार शामिल होते हैं। रामनामी विधवाएं भी राम-नाम में लीन होने आती हैं। रामनामी महासभा के अध्यक्ष गुरू गोसाई इस भजन बैठक को संचालित करते हैं। तीन - चार रामनामी क्रमवार आकर थिरकते हैं। शेष बैठे रामनामी पुरुष और महिलाएं रामधुन में अपना सुर मिलाते हैं। रामचरित मानस का पाठ होता है। हर भजन बैठक के बाद प्रसाद बांटा जाता है। शाम ढलने के बाद की बैठक चरमोत्कर्ष पर होती है। राम-राम का विभिन्न लय में आरोह-अवरोह बेमिसाल रहता है। रामनामी पंथ के टीकाकार द्वारा पारी-पारी रामचरितमानस का पाठ भी अनूठा रहता है। पूजित  ग्रन्थ रामचरित मानस के सामने श्रद्धालु क्रमवार मत्था टेकते है। फिर रामनामी संतों के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लेते हैं। सामने रखी राम दान पेटी में श्रद्धालु यथाशक्ति चढ़ावा भी भेंट करते हैं।    
दहेज़ बगैर सामूहिक विवाह की परम्परा भी जारी
राम राम बड़े भजन मेले की एक उपलब्धि यह भी है कि रामनामी समाज में बिना दहेज के सामूहिक विवाह की अनोखी परंपरा भी शुरू हुई है। विवाह के पहले वर वधु को रामनामी महासभा के निर्धारत शर्तों वाले प्रपत्र को भर कर (हस्ताक्षर सहित) पंजीयन करवाना पड़ता है। बाद में उस प्रपत्र को महासभा के अध्यक्ष मुहर लगाकर हस्ताक्षर कर स्वीकृत करते हैं। मसौदे के तहत पति-पत्नी परित्याग निषेध रहता है। शुरुआती कार्यवाही के बाद दोनों पक्ष से पुजारी द्वारा मात्र एक-एक नारियल लिया जाता है। दांपत्य जीवन में दाखिल होने के प्रमाण स्वरूप वर और वधु के माथे पर राम नाम का गोदनांकन किया जाता है। फिर रामचरितमानस को साक्षी मानकर उसे बीच में रखकर सात फेरे लिए जाते हैं। इस दौरान अभिभावक और अन्य लोग राम-नाम उच्चारित करते हैं। रस्म पूरी होने के बाद वर-वधु के लोग रामचरितमानस पर पच्चीस-पच्चीस रुपए वैवाहिक दक्षिणा बतौर चढ़ाते हैं। रामनामी पंथ में चैत्र मास की रामनवमी को विवाह होना अति शुभ माना जाता है। वैसे वार्षिक सम्मेलन में भी इसी तरह के आदर्श विवाह की प्रथा है। तब रामनाम लिखित जयस्तंभ (चबूतरा) क्षेत्र में विवाह रस्म पूरी होती है। यदि विवाह के बाद कन्या विधवा हो जाती है तो इसका पुनर्विवाह चूड़ी प्रथा द्वारा होता है, तब विवाह करने वाले व्यक्ति को रामनामी समाज को भांति (भोजन) देना पड़ता है। अभिभावक, पति, पत्नी और संतान की मृत्यु होने पर उसकी अस्थियां गंगा नदी के बजाय महानदी में ही विर्सजित की जाती है। शिवरीनारायण में माघ पूर्णिमा को सामूहिक रूप से स्नान करने की परंपरा भी है।

-आलेख और चित्र : दिनेश ठक्कर "बापा" 

मंगलवार, 10 दिसंबर 2013

चुनाव नतीजों के बाद बिलासपुर जिले के बने नए सियासी समीकरण

* भाजपा की नई सरकार में अमर का बढ़ सकता है वजन  
* बद्रीधर दीवान का बढ़ सकता है ओहदा 
* रेणु और अमित जोगी बदल सकते हैं कांग्रेस की दशा-दिशा 
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के सात विधानसभा क्षेत्रों में से तीन भाजपा और चार सीट कांग्रेस के हाथ आने से सियासी समीकरण में बदलाव के आसार दिख रहे हैं। बिलासपुर से लगातार चौथी बार जीत कर इतिहास रचने वाले अमर अग्रवाल और बेलतरा के बुजुर्ग भाजपा प्रत्याशी बद्रीधर दीवान की जीत की हैट्रिक से प्रदेश में इन दोनों का राजनैतिक कद बढ़ना तय माना जा रहा है। भाजपा की नई सरकार में अमर अग्रवाल का वजन बढ़ने की पूरी संभावना है। दीवान का ओहदा भी बढ़ सकता है। बिल्हा से दिग्गज भाजपा प्रत्याशी और विधान सभा अध्यक्ष धरम लाल कौशिक तथा मस्तूरी से भाजपा प्रत्याशी और पूर्व मंत्री डा.कृष्णमूर्ति की करारी हार का सीधा सियासी फायदा अमर अग्रवाल और बद्रीधर दीवान को मिलेगा। जबकि मरवाही से जिले समेत पूरे प्रदेश में रिकार्ड मतों से जीतने वाले जोगी पुत्र अमित और कोटा से तीसरी दफे विजयी जोगी की पत्नी डा. रेणु छत्तीसगढ़ कांग्रेस की दशा और दिशा बदलने में अब अहम भूमिका अदा कर सकती हैं। खुद अजीत जोगी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष चरणदास महंत के कमजोर प्रदर्शन को भुनाने का कोई मौक़ा अब हाथ से जाने नहीं देंगे। 
छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण से पहले भी अविभाजित मध्यप्रदेश के वक्त नई सरकार के मंत्रिमंडल में बिलासपुर और कोटा विधानसभा क्षेत्र से जीते प्रत्याशी का दबदबा रहा है। वर्ष 1951 से लेकर 1985 तक के विधान सभा चुनाव में बिलासपुर सीट पर कांग्रेस का वर्चस्व रहा। पहले कांग्रेस का अभेद्य गढ़ माने जाने वाले बिलासपुर से निरंतर कांग्रेस प्रत्याशी और पत्रकार बीआर यादव ने अपनी जीत की हैट्रिक बनाई थी। लेकिन वर्ष 1990 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी और हॉटल व्यवसायी मूलचंद खंडेलवाल से पराजित होने पर बीआर यादव शहर में लगातार चौथी बार जीत का इतिहास रचने से चूक गए थे। जबकि इस बार भाजपा प्रत्याशी और स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल ने लगातार चौथी बार जीत दर्ज कर शहर में सियासी इतिहास रचने का श्रेय हासिल किया है। उन्होने सीधे मुकाबले में कांग्रेस की प्रत्याशी और महापौर श्रीमती वाणी राव को 15599 मतों से पराजित कर कीर्तिमान स्थापित किया है।अमर अग्रवाल को कुल 72255 और श्रीमती वाणी राव को 56656 वोट मिले। इनके अलावा यहां से अन्य तेरह प्रत्याशी चुनाव समर में थे लेकिन इनमें से कोई भी 850 वोट भी हासिल न कर सका। इन तेरह प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई। जबकि प्राप्त मत की दृष्टि से नोटा बटन (इनमें से कोई नहीं) तीसरे क्रम पर रहा। 3669 मतदाताओं ने नोटा बटन दबा कर किसी भी प्रत्याशी को योग्य नहीं माना।   
अमर अग्रवाल अपनी पिछली तीन चुनावी जीत से बनी साख को इस बार भी भुनाने में सफल रहे। वे शहर के निरंतर विकास के मुद्दे पर मतदाताओं का भरोसा जीतने कामयाब रहे। नागरिकों को सीवरेज प्रोजेक्ट से हुई परेशानियों से चिंतित और विचलित रहे अमर ने मदद का मरहम लगा कर नाराज लोगों को अपने पाले में कर लिया था। कांग्रेस प्रत्याशी महिला होने के कारण उन्होंने चुनाव प्रचार में रणनीति के तहत महिला कार्यकर्ताओं और महिला मतदाताओं को ज्यादा तव्वजो दी। बीते पांच साल के दौरान उन्होंने हर समाज समुदाय के प्रमुख लोगों से सतत संपर्क बनाये रखा। समाज के विभिन्न निर्माण कार्यों के लिए अपनी विधायक निधि से लाखों रूपयों की सहायता राशि भी दी। अपने सिपहसलारों से यह जुमला भी प्रचारित कर रखा है कि "अमर भैय्या ने किसी को फायदा नहीं पहुँचाया है तो किसी का नुकसान भी नहीं किया है।" यह मिथक उनके नियोजित चुनाव प्रबंधन का एक हिस्सा है।बहरहाल, पिता स्वर्गीय लखीराम अग्रवाल की मजबूत राजनैतिक विरासत का लाभ लम्बे वक्त तक अमर अग्रवाल को मिलता रहा है लेकिन अब इन्होने स्वयं अपनी सुदृढ़ सियासी जमीन तैयार कर ली है। वित्त मंत्री रहने के दौरान उनके चर्चित इस्तीफा प्रकरण से हुआ सियासी गड्ढा भी कब का पट चुका है। आबकारी, स्वास्थ्य और नगरीय प्रशासन मंत्री रहते हुए अपने दामन को पाकसाफ रखने उन्हें काफी मशक्कत करनी पडी। लगातार चौथी बार जीत का झंडा लहराने वाले अब अमर कद्दावर भाजपा नेता के रूप में उभरे हैं। जाहिर है इस बार प्रदेश की नई सरकार में रमन सिंह उनका वजन बढ़ाने में कोई संकोच नहीं करेंगे। उनका दर्जा रमन मंत्रिमंडल में दूसरे नंबर के सदस्य बतौर रह सकता है। 
वहीं दूसरी तरफ बेलतरा विधान सभा से जीतने वाले भाजपा के उम्रदराज प्रत्याशी और छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम के अध्यक्ष बद्रीधर दीवान का भी अब सियासी वजूद बढ़ गया है। अविभाजित मध्यप्रदेश के वक्त वे राज्य परिवहन निगम के उपाध्यक्ष थे। वे छतीसगढ़ विधान सभा के उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी भी सम्हाल चुके हैं। इनके राजनैतिक और प्रशासनिक अनुभव को ध्यान में रखते हुए इस बार डा. रमन सिंह उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी दे कर समानित कर सकते हैं। सनद रहे कि बद्रीधर दीवान ने वर्ष 2003 के चुनाव में सीपत सीट से कांग्रेस प्रत्याशी रमेश कौशिक और वर्ष 2008 में परिसीमन के पश्चात नए नाम से बनी बेलतरा सीट से कांग्रेस के भुवनेशवर यादव को हराया था। इस बार फिर उनका मुकाबला भुवनेश्वर यादव से हुआ, जिसमें बद्रीधर दीवान 5728 मतों से विजयी हुए। बद्रीधर दीवान को कुल 50890 और भुवनेश्वर को 45162 वोट मिले। यहाँ सत्रह प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। जातिगत समीकरण और कांग्रेस के वोट काटू प्रत्याशियों की मौजूदगी का फायदा भी इन्हें मिला। इस तरह बद्रीधर दीवान जीत की हैट्रिक बनाने में सफल रहे।                         
जहाँ तक कांग्रेस खेमे में चुनावी नतीजों के बाद उपजे सियासी समीकारण का सवाल है तो इस परिप्रेक्ष्य में अजीत जोगी के कट्टर समर्थक सियाराम कौशिक की दलीय स्थिति भी मजबूत होगी। बिल्हा विधान सभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी सियाराम कौशिक ने भाजपा के दिग्गज प्रत्याशी और विधान सभा अध्यक्ष धरम लाल कौशिक को 10968 मतों से पराजित कर खलबली मचा दी है। सियाराम को कुल 83598 और धरम लाल को 72630 मत हासिल हुए। यहां कुल पंद्रह उम्मीदवार थे। सियाराम पूर्व में भी बिल्हा से कांग्रेस विधायक रह चुके हैं। अजीत जोगी ने अपनी प्रतिष्ठा दांव पर लगा कर राहुल फार्मूले को शिथिल करवा कर इन्हें टिकट दिलवाया था। इनके क्षेत्र में प्रचार और जन सभा की कामयाबी के मामले में अजीत जोगी नरेंद्र मोदी पर भारी पड़े। अब सियाराम को संगठन में जोगी सम्मानजनक पद दिलवा सकते हैं।   
वहीं दूसरी तरफ जोगी पत्नी और पुत्र का सियासी जलवा भी बढ़ गया है। कोटा विधान सभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी डा रेणु जोगी लगातार तीसरी बार जीती है। उन्होंने भाजपा के काशी राम साहू को 5089 मतों से हराया। डा. रेणु जोगी को कुल 58390 और काशी राम साहू को 53301वोट मिले। यहां 19 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। संगठन में अब तक उपेक्षित रही डा. रेणु जोगी को अब एक नए शक्ति केंद्र के रूप में उनके पति द्वारा प्रोजेक्ट करवाने में जुगत तेज कर दी जायेगी। अजीत जोगी द्वारा पुत्र अमित को अपनी मरवाही सीट से रिकार्ड मतों से चुनाव जीता कर नए राजनैतिक समीकरण का अहसास करा दिया है। राजनैतिक उत्तराधिकारी बतौर अमित जोगी अब संगठन में भूचाल ला सकते हैं।       
गौरतलब है कि मरवाही विधानसभा क्षेत्र से अमित जोगी 46250 रिकार्ड मतों से जीते हैं। उन्होने भाजपा प्रत्याशी समीरा पैकरा को हराया है। अमित जोगी को कुल 82909 और समीरा पैकरा को 36659 मत प्राप्त हुए। यहां कुल दस प्रत्याशी थे। अमित की जीत के आंकड़े जिले ही नहीं बल्कि पूरे राज्य में एक कीर्तिमान स्वरूप है। अमित ने अपने पिता की जीत का रिकार्ड भी तोड़ दिया है। 
अजीत जोगी ने इस बार मस्तूरी विधान सभा क्षेत्र से भी अपनी साख दांव पर लगा दी थी। उन्होंने यहाँ से कांग्रेस का टिकट नए चहेरे दिलीप लहरिया को दिलाया था। इस क्षेत्र के जनप्रिय लोक कलाकार दिलीप ने भाजपा सरकार के पूर्व मंत्री डा. कृष्णमूर्ति बांधी को 24146 मतों से करारी शिकस्त दी। दिलीप लहरिया को कुल 86509 और डा. कृष्णमूर्ति बांधी को 62363 वोट मिले। यहां कुल तेरह प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे थे। डा. बांधी की शर्मनाक हार की असली वजह क्षेत्र में उनकी निष्क्रियता, दुर्व्यवहार और दुष्कर्म संबंधी लगे आरोप को मानी जा रही है। विजयी दिलीप को भी संगठन में सक्रिय कराने की कवायद में अजीत जोगी जुटे हैं।
- दिनेश ठक्कर "बापा"

शुक्रवार, 22 नवंबर 2013

मतदान के आंकड़ों से लगाये जा रहे जीत हार के कयास



बिलासपुर जिले के सात विधान सभा क्षेत्रों में हुए मतदान के अंतिम आकड़ें आने के बाद उम्मीदवारों, उनके समर्थकों और चुनाव विश्लेषकों द्वारा जीत हार के कयास लगाने शुरू हो गए हैं। अपने अपने क्षेत्र का मतदान प्रतिशत और बूथवार रूझान देख कर जीत हार का गुणा भाग लगाने की कवायद हो रही है। जिले में सर्वाधिक 83.66 फीसदी मतदान मरवाही सीट में होने पर कांग्रेस प्रत्याशी अमित जोगी रिकार्ड मतों से जीत का दावा कर रहे हैं। तो वहीं दूसरी तरफ बिलासपुर विधान सभा क्षेत्र में अप्रत्याशित रूप से सबसे कम 60.44 प्रतिशत मतदान होने के बावजूद भाजपा प्रत्याशी अमर अग्रवाल ने चौथी बार भी जीतने का भरोसा जताया है।  
छत्तीसगढ़ विधान सभा चुनाव के लिए मंगलवार को हुए मतदान के अंतिम आंकड़ें जिला निर्वाचन कार्यालय द्वारा बुधवार को जारी किये जाने के बाद प्रत्याशियों, समर्थकों और चुनाव विश्लेषकों ने जीत हार का कयास लगाना शुरू कर दिया है। पिछले विधान सभा चुनाव के मुकाबले इस बार जिले में 6.08 प्रतिशत मतदान अधिक हुआ है। जिले के सात विधान सभा क्षेत्रों में इस दफे कुल 73.76 फीसदी मतदान होने पर सियासी कयासों और चुनावी नतीजों के आंकलन का दौर प्रारम्भ हो गया है। सबसे अधिक 83.66 प्रतिशत मतदान मरवाही में हुआ। पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने अपनी चर्चित मरवाही सीट से इस बार अपने पुत्र अमित जोगी का राजनैतिक भविष्य संवारने बतौर कांग्रेस प्रत्याशी उसे चुनाव लड़वाया है। जिले में सबसे कम 60.44 प्रतिशत मतदान बिलासपुर विधान सभा क्षेत्र में दर्ज किया गया है। यह सीट भी नगरीय प्रशासन मंत्री और नगर भाजपा विधायक अमर अग्रवाल और कांग्रेसी महापौर वाणी राव के कारण सुर्ख़ियों में है। अधिक मतदान के मामले में दूसरे क्रम में कोटा सीट रही, जहाँ 77.20 फीसदी मतदान हुआ। यहाँ से अजीत जोगी की पत्नी और विधायक डा. रेणु जोगी के फिर चुनाव लड़ने से यह सीट हाई प्रोफाइल बन चुकी है। तखतपुर में 77.06, विधान सभा अध्यक्ष धरम लाल कौशिक की बिल्हा सीट में 76.58, मस्तूरी में 74.73 और बेलतरा सीट में 69.37 प्रतिशत मतदान हुआ। जिले इस बार महिलाओं ने पुरूषों की अपेक्षा मतदान करने में दिलचस्पी ज्यादा दिखाई है। महिलाओं का मतदान प्रतिशत 73.80 और पुरूषो का मतदान प्रतिशत 73.71 रहा।
जिले में मतदान का प्रतिशत बढ़ने पर कांग्रेस की बांछे खिली हुई है। इस मामले में जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अरूण तिवारी का कहना है कि भीड़ जुटने, जुलूस निकलने का मतलब विरोध होता है। इस बार राज्य की भाजपा सरकार और स्थानीय भाजपा विधायक के खिलाफ विरोध जताने, वोट डालने मतदाताओं की भीड़ उमड़ पडी थी। जहाँ तक महिलाओं के अधिक मतदान प्रतिशत की बात है तो यह झलियामार समेत समूचे राज्य में महिलाओं के प्रति हुए शोषण, अत्याचार की घटनाओं का बदला है। ज्यादा मतदान कर महिलाओं ने रमन सरकार और उनके नुमाइंदों के खिलाफ अपना आक्रोश प्रकट किया है। तो वहीं जिला भाजपा अध्यक्ष राजा पांडे का मानना है कि अधिक मतदान होना जिले समेत समूचे राज्य में भाजपा सरकार की लोकप्रियता और विकास कार्यों का ही नतीजा है। जबकि बिलासपुर में कम मतदान को लेकर उनका दावा है कि इससे कांग्रेस को ही नुकसान होगा। भाजपा की जीत सुनिश्चित है। 
जिले के सात विधान सभा क्षेत्रों में तुलनात्मक रूप से सबसे कम 60.44 फीसदी मतदान बिलासपुर विधान सभा क्षेत्र में होना प्रतिद्वंदी भाजपा प्रत्याशी अमर अग्रवाल और कांग्रेस प्रत्याशी वाणी राव के लिए चिंता का सबब बन गया है। गौरतलब है कि बिलासपुर में वर्ष 2003 में 62.40 प्रतिशत और 2008 के विधान सभा चुनाव में 61.17 फीसदी मतदान हुआ था। पिछले दो विधान सभा चुनाव के मुकाबले इस बार बिलासपुर जैसी हाई प्रोफाइल सीट में मतदान का प्रतिशत लगातार घटना चुनाव विश्लेषकों की नजर में जीत की लीड कम होने और अप्रत्याशित चुनावी नतीजे आने का स्पष्ट संकेत है। हालांकि मौजूदा विधायक और भाजपा उम्मीदवार अमर अग्रवाल को चौथी दफे भी जीत की उम्मीद है। शहर के बढ़ते विकास के नाम पर वे जीत के प्रति आश्वस्त हैं। जबकि महापौर और निकटतम प्रतिद्वंदी कांग्रेस प्रत्याशी राव बदलाव के बयार की बात कह रही हैं। वे चुनावी इतिहास रचने का दावा कर रही हैं। उनके मुताबिक शहर की बदहाली और नागरिकों को सीवरेज से हुई परेशानियां ही अमर अग्रवाल की हार का कारण बनेंगी।        
अमित जोगी ने रिकार्ड मतों से जीतने का किया दावा
जिले के मरवाही विधान सभा क्षेत्र जैसे पिछड़े और सीमावर्ती इलाके में इस बार सर्वाधिक 83.66 मतदान होने को लेकर राजनैतिक चर्चाएं सरगर्म हैं। यहाँ कुल मतदाता 168269 है। यहाँ मतदान करने के मामले में पुरूष आगे रहे। पुरूष मतदान 83.73 और महिला मतदान प्रतिशत 83.59 रहा। यह सीट छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी की रही है। पेंड्रा रोड के समीप स्थित ग्राम जोगीसार में जन्में अजीत जोगी का गहरा जनाधार इस इलाके में तो है ही, साथ ही समूचे बिलासपुर जिले को वे अपनी कर्म भूमि मानते है। अनुसूचित जन जाति के लिए आरक्षित मरवाही सीट से तीन बार विधायक रहे अजीत जोगी ने यहाँ से सर्वाधिक मतों से जीतने का रिकार्ड भी बनाया था। अपनी इसी सियासी भूमि पर इस बार उन्होंने अपने पुत्र अमित जोगी को कांग्रेस के युवा योद्धा बतौर उतारा ताकि वह भी अपना पोलिटिकल कैरियर बना सके। यहाँ अजीत जोगी के समर्थकों की पूरी फ़ौज अमित के प्रचार में जुटी थी। अजीत जोगी ने यहाँ ज्यादा वक्त भी नहीं दिया था। उन्होंने मरवाही क्षेत्र में अमित को अपनी स्वतन्त्र छवि और राजनैतिक अस्तित्व बनाने के मद्देनजर अकेला छोड़ दिया था। इस बार हुए सबसे ज्यादा मतदान को लेकर खुद अमित जोगी भी अपने पिता की तरह बेहद उत्साहित और प्रसन्न हैं। मतदान के अंतिम आंकड़े आने के बाद अमित ने दावा किया कि उन्हें चुनाव के दौरान क्षेत्र के सभी वर्गों से भरपूर सहयोग, स्नेह और आशीर्वाद मिला। वे भी अपने पापा की तरह रिकार्ड मतों से जीतेंगे। वे आगे भी पापा की तरह क्षेत्र के लोगों की सेवा कमिया बन कर करते रहेंगे। भाजपा प्रत्याशी समीरा पैकरा को क्षेत्र की जनता नकार चुकी है। आठ दिसंबर को आने वाले चुनाव नतीजों से यह बात स्पष्ट भी हो जायेगी।   

-दिनेश ठक्कर "बापा"     .                  

शुक्रवार, 8 नवंबर 2013

कांग्रेस सरकार ने देश को लूटने का कार्य किया - सुषमा

केंद्र में कांग्रेस की सरकार ने देश को लूटने का कार्य बरसों तक किया है। भ्रष्टाचार और घोटालों में लगातार बढ़ोत्तरी हुई है। जबकि भाजपा शासित राज्य सरकारों ने अपने प्रदेश को आर्थिक रूप से मजबूत किया है और लोगों को सुशासन दिया है। यह बात गुरूवार को भाजपा की स्टार प्रचारक सुषमा स्वराज ने छत्तीसगढ़ के तखतपुर विधानसभा क्षेत्र के तहत् आने वाले ग्राम गनियारी और मस्तूरी सीट के सीपत क्षेत्र में आयोजित चुनावी सभा के दौरान कही।
भाजपा नेत्री और लोकसभा की नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने गनियारी और सीपत की चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में रमन सिंह की सरकार ने विकास के अनेक कार्य किए हैं। रमन सिंह ने अपने सुशासन और विकास कार्यों के बदौलत छत्तीसगढ़ राज्य का नाम देश के अग्रणी विकसित राज्यों की सूची में दर्ज करा दिया है। यह गौरव की बात है। रमन सिंह की पीडीएस की योजना की तारीफ पूरे देश में हो रही है। रमन सिंह ने किसानों के साथ-साथ युवाओं की भलाई के लिए भी काफी कार्य किए हैं। उनको दी जाने वाली सुविधाओं में इजाफा किया है। इसलिए भाजपा प्रत्याशियों को जनता जरूर जिताएगी, ऐसा मेरा विश्वास है और राज्य में फिर से रमन सिंह की सरकार बनेगी। तीसरी बार भाजपा की सरकार बनने के बाद किसानों को धान पर 300 रूपए प्रति क्विंटल बोनस दिया जाएगा। इसके अलावा अन्य कई महात्वाकांक्षी योजनाओं पर भी अमल किया जाएगा, जिससे छत्तीसगढ़ के नागरिकों को भरपूर फायदा मिलेगा।
भीड़ जुटाने में असफल रहे भाजपाई
सुषमा स्वराज ने गनियारी और सीपत में करीब पंद्रह-पंद्रह मिनट अपना भाषण दिया। वे गनियारी में करीब निर्धारित समय से 25 मिनट देर से पहुंची थी। भाषण शुरू करने से पहले ही उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया था कि वे ज्यादा नहीं बोलेंगी, क्योंकि उन्हें शाम तक कुछ अन्य सभाएं भी लेनी हैं। गौरतलब है कि गनियारी और सीपत में सुषमा स्वराज के सभास्थल में ग्रामीणों की भीड़ काफी कम थी। दोनों जगह पंडाल का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा खाली नजर आया। यहां भाजपा के पुराने कार्यकर्ताओं द्वारा भीतरघात और असहयोग किए जाने के कारण अपेक्षा के अनुरूप सभास्थल में ग्रामीणों की भीड़ जुटा पाने में प्रत्याशियों के समर्थक असफल रहे। तखतपुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के प्रत्याशी राजू सिंह क्षत्री और मस्तूरी से भाजपा प्रत्याशी डा. कृष्णमूर्ति बांधी को उम्मीद थी कि पार्टी की स्टार प्रचारक और कुशल वक्ता सुषमा स्वराज को सुनने के लिए ग्रामीण मतदाताओं की भीड़ उमड़ पड़ेगी। जबकि ऐसा नहीं हो सका। ये दोनों सभाएं पूरी तरह फ्लॉप दिखीं।

-दिनेश ठक्कर "बापा"
 (चित्र - साभार रतन जैसवानी)  

केंद्र में हमारी सरकार बनी तो देश के हालात बदल देंगे - राजनाथ

देश में 55 वर्षों तक कांग्रेस ने केंद्र में सरकार चलाई, फिर भी वह आज तक महंगाई कम नहीं कर सकी। देश में बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और घोटाले लगातार तेजी से बढ़े हैं। नेहरू परिवार द्वारा देश में लंबे समय तक हुकुमत करने के बावजूद अब तक गरीबी दूर नहीं हो सकी है। दुनिया के एक तिहाई गरीब इसी देश में हैं। आज बेरोजगार रोजगार की तलाश में दर-दर ठोकरें खा रहे हैं। अगर हमें इस बार केंद्र में सरकार बनाने का मौका मिलेगा तो हम देश के हालात बदल देंगे। यह बात भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने गुरूवार को छत्तीसगढ़ के बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम भाड़ी में चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कही।
बिलासपुर से 35 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम भाड़ी में भाजपा के पक्ष में प्रचार करने पहुंचे राजनाथ सिंह ने अपने भाषण में सोनिया और राहुल गांधी की आलोचना करते हुए कहा कि देश की आजादी के बाद से लगभग 55 वर्षों तक सत्ता में रहने वाली कांग्रेस की सरकार ने देश को क्या दिया ? जो काम कांग्रेस की सरकारों ने बीते वर्षों में नहीं किया, उससे भी अधिक काम छत्तीसगढ़ की रमन सरकार ने 10 साल में कर दिखाया है। जब रमन सिंह 10 वर्षों के भीतर छत्तीसगढ़ की तस्वीर बदल सकते हैं, तो नेहरू, इंदिरा, राजीव, सोनिया गांधी ने आखिर इतने वर्षों में देश की तस्वीर क्यों नहीं बदली। राहुल गांधी दौरे पर जब जाते हैं, तो प्रायोजित मीडिया के जरिए लुभावनी तस्वीरें खिंचवाकर जनता को गुमराह करते हैं। लंबे समय तक यदि राजनीति करना हो, तो लोगों की आंखों में धूल झोंककर नहीं, लोगों का दिल जीतकर राजनीति की जाती है। राहुल गांधी आज के नौजवानों को गुमराह कर रहे हैं। सोनिया गांधी भी यही कार्य कर रही है। इनके परिवार ने देश की जनता को धोखा दिया है। जनता को छला है। जिस दिन भारत कांंग्रेस मुक्त होगा, तब देश बेरोजगारी, महंगाई और भ्रष्टाचार से भी मुक्त हो जाएगा। देश में संसाधनों और श्रम शक्ति की कमी नहीं है, बल्कि इसका सही सदुपयोग होना चाहिए। देश में महंगाई, घोटाले, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी हद से अधिक बढ़ चुके हैं और इसकी जिम्मेदार सिर्फ कांग्रेस है। अगर केंद्र और राज्य में हमारी सरकार आई तो आगामी पंद्रह बरसों के भीतर देश से गरीबी और बेरोजगारी का नामोनिशान मिटा देंगे।
श्री सिंह ने मनमोहन सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उन्होंने सौ दिन के भीतर महंगाई कम करने का वादा किया था, लेकिन हजार दिन बीत जाने के बावजूद महंगाई नहीं थमी है। केंद्र सरकार महंगाई घटाने में विफल रही है, जबकि अटल बिहारी की सरकार के दौरान छह वर्षों तक महंगाई को बढऩे से रोका गया था। अटलजी के कार्यकाल के दौरान अमेरिका जाने वाले भारतीय नागरिकों को सम्मान की नजरों से देखा जाता था, जबकि आज मनमोहन सरकार के वक्त देश के नागरिकों को अमेरिका में बेहद गरीब माना जाता है। मनमोहन सिंह आज हाथ फैलाकर विदेशी निवेश की बात करते हैं, दरअसल वे देश को विदेशी पूंजीपतियों के हवाले करना चाहते हैं।
 राजनाथ सिंह ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह की तारीफ में कसीदे गढ़ते हुए कहा कि रमन सरकार ने 10 वर्षों में जो काम किया है, वह हिन्दुस्तान के किसी दूसरे राज्य में देखने को नहीं मिला है। 2003 से 2013 तक यदि हमने जनता के भलाई के लिए काम किया है, तो इस चुनाव में भाजपा को वोट दीजिएगा। वैसे भाजपा सरकार ने अपने कार्यकाल में हर वादे को निभाया है। अगर हमने अपनी सत्ता के दौरान जनता को धोखा किया है, आंखों में धूल झोंकी है, तो मेरे पते पर दिल्ली में एक चिट्ठी लिखकर भेज दीजिए। कभी भी हमने गलत बात कही हो तो इसके लिए हम क्षमा चाहते हैं। 2003 के चुनाव के बाद हमने 1 और 2 रूपए किलो चावल देने की योजना शुरू की थी। हमने चुनाव में इसका वादा भी नहीं किया था, लेकिन योजना शुरू की, जिसकी तारीफ देश भर ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी हुई है। छत्तीसगढ़ में रमन सरकार ने हर माह गरीबों को 35 किलो चावल देने का जो कानून लागू किया है, वह किसी भी राज्य में नहीं है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि 10 साल पहले प्रदेश में किसानों से धान की खरीदी भी ठीक ढंग से नहीं होती थी और न ही इसकी उचित कीमत उन्हें मिलती थी। वर्तमान में हर क्षेत्र में धान खरीदी केंद्र भी बढ़े हैं। किसानों को धान की कीमत के अलावा 270 रूपए प्रति क्विंटल बोनस भी दिया जा रहा है, जो किसी दूसरे राज्य में नहीं दिया जाता है। एक माह बाद जब भाजपा सरकार तीसरी बार सत्ता में आएगी तो किसानों को धान का बोनस 300 रूपए प्रति क्विंटल दिया जाएगा। विभिन्न योजनाओं के तहत् दी जा रही पेंशन भी दोगुनी की जाएगी।
कांग्रेस की सरकार मीडिया के सर्वे से विचलित
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने आमसभा के बाद मंच के पास पत्रकारों से बातचीत में कहा कि कांग्रेस की सरकार मीडिया द्वारा कराए जा रहे सर्वेक्षण से विचलित हो गई है और उस पर रोक लगाने के उपाय कर रही है। यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कुठाराघात है। मीडिया देश का चौथा स्तंभ है। इस तरह के सर्वे पर रोक नहीं लगनी चाहिए। भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष करूणा शुक्ला द्वारा पार्टी छोडऩे और बगावत किए जाने के मामले में उन्होंने कहा कि करूणा शुक्ला का इस्तीफा हमें मिल गया है और उसे हमने स्वीकार भी कर लिया है। जहां तक बगावत किए जाने का सवाल है तो इससे पार्टी को कोई फर्क नहीं पड़ेगा। भाजपा से बगावत करने वाले बागी प्रत्याशियों के पक्ष में करूणा शुक्ला द्वारा प्रचार-प्रसार किए जाने से भी भाजपा को कोई नुकसान नहीं होगा। भाजपा के प्रति करूणा शुक्ला द्वारा दिए गए विरोधी बयानों का कोई आधार नहीं है। वे पूरी तरह बेबुनियाद हैं।
बिना अनुमति के वाहनों से रोजी पर लाया गया ग्रामीणों को
राजनाथ सिंह की आमसभा में भीड़ जुटाने के लिए लगभग 40 वाहनों को लगाया गया था। यही नहीं बल्कि आसपास के गांवों से रोजी पर ग्रामीणों को एकत्रित कर उन्हें वाहनों से आमसभा स्थल तक लाया गया था। ट्रेक्टर, मेटाडोर और अन्य वाहनों को सभास्थल के पास बड़ी संख्या में देखा गया, जबकि चुनाव आयोग द्वारा इस तरह किसी को भी लाए जाने पर रोक लगाई गई है। वहीं  दूसरी ओर बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के चुनाव प्रभारी द्वारा ग्रामीणों को प्रलोभन देने के लिए सभास्थल के आसपास चाय-नाश्ते के ठेले भी लगवाए गए थे। वहां ग्रामीणों को मुफ्त चाय-नाश्ता कराने की व्यवस्था की गई थी।
हैलीकाप्टर उतरा तो मची भगदड़
सभास्थल के बिलकुल निकट हैलीपैड बनाया गया था। सभा से पहले काफी तादाद में ग्रामीण हैलीकाप्टर देखने के लिए इकट्ठे हुए थे। जब राजनाथ सिंह का हैलीकाप्टर हैलीपैड पर उतरा तो आंधी-तूफान की तरह धूल इस कदर उड़ी कि मौके पर ग्रामीणों की भगदड़ मच गई। हैलीपैड के आसपास पुलिस प्रशासन की व्यवस्था लचर दिखाई दी। ऐसे में कोई हादसा भी हो सकता था, क्योंकि हैलीपैड मंच से ज्यादा दूर नहीं था और लैंडिंग के वक्त ऐसी स्थिति निर्मित हो गई थी। आंखों में धूल पडऩे से ग्रामीण काफी देर तक परेशान होकर आंखों को मलते रहे और भाजपाईयों को कोसते रहे।

-दिनेश ठक्कर "बापा"
  (चित्र : साभार रतन जैसवानी)


दबंग दुनिया में प्रकाशित चुनावी हलचल पर मेरी रपट


गुरुवार, 7 नवंबर 2013

बागियों ने बिगाड़ा बिलासपुर जिले का चुनावी समीकरण


छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के सात विधान सभा क्षेत्रों में तखतपुर ही एक मात्र ऐसी सामान्य सीट जो भाजपा और कांग्रेस के बागियों के चुनाव समर में डटे रहने के कारण पंचकोणीय मुकाबले वाली सीट हो गई है। जबकि मस्तूरी में त्रिकोणीय मुकाबले के आसार हैं। इसी तरह बेलतरा में फिलहाल भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर दिखाई दे रही है, लेकिन अंतिम क्षणों में अनुसूचित जाति के बसपा और निर्दलीय प्रत्याशी सीधे मुकाबले को उलझा भी सकते हैं। .      
तखतपुर सामान्य सीट में इस दफे पंच कोणीय मुकाबला होने की संभावना है। यहाँ कुल सोलह उम्मीदवार मैदान में हैं। मुख्य राष्ट्रीय दलों के प्रत्याशियों द्वारा प्रलोभन दिए जाने के बावजूद यहाँ किसी भी बागी और निर्दलीय उम्मीदवार ने नामांकन पत्र वापस नहीं लिया है। यहाँ के पूर्व कांग्रेस विधायक बलराम सिंह ठाकुर के बेटे और कांग्रेस प्रत्याशी आशीष सिंह ठाकुर अपने ही दल के बागी शिवा माली से आक्रांत हैं। आशीष प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष चरणदास महंत के चेले हैं। उन्हें चौतरफा कड़े मुकाबले से उबारने महंत ने सियासी गोटिया बिछा दी है किन्तु उसका फायदा शायद ही मिलेगा। टिकट न मिलने से नाराज कांग्रेस के बागी और जिला पंचायत सदस्य शिवा माली निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में आशीष को बददुआ देते हुए उसे निपटाने की जुगत में लगे है। इसी तरह मौजूदा विधायक और भाजपा प्रत्याशी राजू सिंह क्षत्री को भी बागी हुए भाजपा के पूर्व विधायक और शिव सेना प्रत्याशी जगजीत सिंह मक्कड़ पटखनी देने कमर कस चुके हैं। इन सबकी लड़ाई का फायदा उठाने बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी संतोष कौशिक अपने पक्ष में माहौल बनाने जुटे है. वे भी जिला पंचायत के सदस्य हैं, इसलिए उनकी क्षेत्र में पकड़ मजबूत बनी हुई है। खासकर अनुसूचित जाती के मतदाताओं में उनकी गहरी पैठ है। वे यहाँ का सियासी समीकरण बदलने की क्षमता रखते हैं। सही तस्वीर इस हफ्ते स्पष्ट हो जायेगी।
जबकि बेलतरा सामान्य सीट पर भाजपा के वर्त्तमान विधायक और बुजुर्ग प्रत्याशी बद्रीधर दीवान और कांग्रेस के प्रत्याशी भुवनेश्वर यादव के बीच सीधी टक्कर होनी है। पिछली बार भुवनेश्वर यादव को पराजय मिली थी। इस बार उन्हें जीत का भरोसा है. लेकिन जातिगत समीकरण फिलहाल भाजपा के ब्राह्मण प्रत्याशी बद्रीधर दीवान के पक्ष में दिख रहे हैं।.बहुजन समाज पार्टी को पिछले चुनाव में वोट करने वाले अनुसूचित जाति के कई परंपरागत मतदाता कार्यकर्ता भाजपा से जुड़ गए है। इसका सीधा फायदा भाजपा प्रत्याशी बद्रीधर दीवान को मिल सकता है। हालांकि अंतिम क्षणों में बहुजन समाज के प्रत्याशी देवकुमार कनेरी सहित अनुसूचित जाति के एक दो निर्दलीय प्रत्याशी जातिगत समीकरणों के चलते सीधे मुकाबले को उलझा सकते हैं।    बेलतरा में कुल सत्रह प्रत्याशी चुनाव समर में उतरे हैं। यहाँ भी भाजपा और कांग्रेस द्वारा कुछ निर्दलीय प्रत्याशियों को नाम वापस लेने आर्थिक प्रलोभन दिया गया था, ताकि दो ईवीएम लगाने की नौबत न आए और नोट बटन का भय उत्पन्न न हो।  
वही दूसरी तरफ मस्तूरी सुरक्षित सीट पर भी त्रिकोणीय मुकाबला  होने की संभावना प्रबल है। यहाँ के मौजूदा भाजपा विधायक डा कृष्णमूर्ति बांधी तीसरी बार चुनाव लड़ रहे है। उनका मुकाबला कांग्रेस के नए चहेरे और प्रत्याशी दिलीप लहरिया से होना है। लहरिया इस क्षेत्र के नामी लोक कलाकार है। अपनी कला प्रतिभा के जरिये वे यह चुनाव जीतने की मंशा पाले हुए हैं.किन्तु यहाँ बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी तुकाराम जोशी, निर्दलीय प्रत्याशी राजेश्वर भार्गव कांग्रेस प्रत्याशी की जड़ों में मठा डालने की कोशिश कर रहे है। इसीलिये भाजपा प्रत्याशी बांधी को अपनी जीत की आशा बंधी हुई है। यहाँ कुल तेरह उम्मीदवार मैदान में हैं। ज्ञात हो कि मस्तूरी सीट अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व है। इस इलाके में सूर्यवंशी और सतनामी समाज के लोगों की संख्या लगभग बराबर है। सतनामी समाज के अग्रणी लोगों का इस बात पर विरोध कायम है कि कांग्रेस ने उनके समाज के व्यक्ति को टिकट नहीं देकर उपेक्षा की है।जिला पंचायत सदस्य और निर्दलीय प्रत्याशी राजेश्वर भार्गव कांग्रेस की टिकट के आकांक्षी थे। टिकट न मिलने से नाराज होकर बतौर निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे राजेश्वर भार्गव की नजर में कांग्रेस प्रत्याशी दिलीप लहरिया भाजपा प्रत्याशी डा बांधी की तुलना में बेहद कमजोर उम्मीदवार हैं। इसलिए लहरिया की सामाजिक और राजनैतिक कमजोरी का लाभ उन्हें मिलेगा।              

- दिनेश ठक्कर "बापा"