अभिव्यक्ति की अनुभूति / शब्दों की व्यंजना / अक्षरों का अंकन / वाक्यों का विन्यास / रचना की सार्थकता / होगी सफल जब कभी / हम झांकेंगे अपने भीतर
गुरुवार, 22 अक्टूबर 2015
बुधवार, 21 अक्टूबर 2015
हैदराबाद की प्रदूषित हुसैन सागर झील
चार मीनार की तरह हुसैन सागर झील भी हैदराबाद (तेलंगाना) की पहचान को रेखांकित करती है| यह कृत्रिम झील है, जो वर्ष 1562 में में मूसी नदी की सहायक नदी पर निर्मित की गई थी| इस झील की अधिकतम लंबाई करीब 3.2 कि.मी. और चौड़ाई करीब 2.8.कि.मी. है| इसकी अधिकतम गहराई 32 फुट है| यह झील हैदराबाद और इसके जुड़वा शहर सिकंदराबाद को विभाजित करती है| इस झील की शोभा बढ़ाने के लिए वर्ष 1992 में मध्य भाग स्थित टापू पर गौतम बुद्ध की ऊंची प्रतिमा स्थापित की गई थी| इस झील के चारों ओर पर्यटन और धार्मिक स्थल भी हैं, जो इसके आकर्षण में वृद्धि करते हैं| मसलन,जल विहार, लुम्बिनी गार्डन, एनटीआर गार्डन, स्नो वर्ल्ड, नेकलेस रोड, बिरला निर्मित संग्रहालय,मंदिर आदि| लेकिन दुःख का विषय यह है कि झील पिछले तीन दशक से निरंतर प्रदूषित हो रही है| इसका पानी बेहद प्रदूषित हो गया है| आसपास के आवासीय और औद्योगिक क्षेत्र का प्रदूषित जल इस झील में प्रवाहित किया जा रहा है| शासन प्रशासन द्वारा प्रदूषण पर अंकुश लगाने अब तक कोई ठोस उपाय नहीं किये गये हैं| और न ही सामाजिक संस्थाओं द्वारा भी इस दिशा में कोई सकारात्मक पहल की जा रही है| गौरतलब है कि हैदराबाद और सिकंदराबाद के लोगों द्वारा इस झील में ही हर वर्ष हजारों की संख्या में छोटी बड़ी गणेश और दुर्गा प्रतिमाएं भी विसर्जित की जाती है| इस दौरान पूरा महानगर उमड़ पड़ता है| इससे चारों और गन्दगी पसर जाती है| मोदी जी का स्वच्छ भारत अभियान यहां नजर नहीं आता| साफ़ सफाई राम भरोसे है|
@ दिनेश ठक्कर बापा
@ दिनेश ठक्कर बापा
रविवार, 11 अक्टूबर 2015
रामोजी फिल्म सिटी में एक दिन
हैदराबाद से 25 किलोमीटर दूर नल्गोंडा मार्ग पर स्थित रामोजी फिल्म सिटी का अवलोकन यादगार रहा| दक्षिण भारत के विख्यात फिल्म निर्माता और मीडिया ग्रुप संचालक रामोजी राव ने वर्ष 1996 में इसकी स्थापना की थी| दो हजार एकड़ से भी अधिक क्षेत्रफल में विस्तृत इस आउटडोर इनडोर फिल्म सिटी में पचास शूटिंग फ्लोर हैं| यहां एक साथ पच्चीस फिल्मों की शूटिंग संभव है| प्री प्रोडक्शन से लेकर पोस्ट प्रोडक्शन तक सभी आधुनिक उपकरण,साधन सुविधाएँ उपलब्ध हैं| यहां पांच सौ से अधिक सेट लोकेशन हैं| एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, सेन्ट्रल जेल, गाँव शहर के लोकेशन वाले विविध स्थाई सेट,चीन, यूरोप और देश के प्रमुख शहरों के बगीचों की अनुभूति कराने वाले गार्डन आदि मनमोहक हैं| रामोजी ग्रुप की इकाई उषा किरण मूवीज़ लिमिटेड ने हॉलीवुड की तर्ज पर इस फ़िल्म सिटी को साकार किया है| गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज यह विश्व का सबसे बड़ा फ़िल्म स्टुडियो कॉम्पलेक्स माना जाता है| पर्यटन स्थल बतौर भी विकसित होने के कारण यहां हर वर्ष दस लाख से भी अधिक लोग आते हैं| गाइड के नेतृत्व में रेड विंटेज बस से फ़िल्म सिटी का भ्रमण आनंददायक और ज्ञानवर्धक होता है| एक्शन थियेटर, फ़िल्मी दुनिया, बोरासुरा मैजिशियन वर्कशॉप, बर्ड पार्क, यूरेका, स्प्रीट ऑफ रामोजी,फोर्ट फ्रंटियर स्टंट शो, लाइट कैमरा एक्शन, दादाजी लाइव टीवी शो, नृत्य प्रस्तुति सहित विविध राइड पर्यटकों को लुभाते हैं| लेकिन फिल्मों की शूटिंग के दरम्यान सेट पर पर्यटकों के जाने पर सख्त मनाही है| उसके बावजूद हर पर्यटक भ्रमण के बाद सुखद अनुभूति के साथ लौटता है|
_ दिनेश ठक्कर बापा
_ दिनेश ठक्कर बापा
शुक्रवार, 14 अगस्त 2015
पाखंडी मुखौटे पहने हैं
चरित्र कलंकित कर
चेहरा चमका रहे हैं
चालचलन बिगाड़ कर
चालाकी का चोला ओढ़े हैं
चेहरा चमका रहे हैं
चालचलन बिगाड़ कर
चालाकी का चोला ओढ़े हैं
हमें मुखर होकर
उनका मुखौटा उतारना है
हमें अलख जगा कर
उनका गोरखधंधा बंद कराना है
हमें सच्चाई की राह पर चल कर
उनका असली चेहरा दिखाना हैै
@ दिनेश ठक्कर बापा
(चित्र : गूगल से साभार)
गुरुवार, 13 अगस्त 2015
भूखे इंसानों के बनाए आकार प्रकार
बस्ती के मुहाने पर
सड़क के किनारे तंबू लगा कर
भूखे इंसानों का परिवार
पत्थरों को तराश कर
ईमानदारी से गढ़ रहा है
प्रतिमाओं का प्रकार
उनकी छेनी हथौड़ी का प्रहार
आस्था को दे रहा है आकार
बेबस अशक्त और निर्धन हाथ
बेजान पत्थरों में प्राण फूंक कर
रच रहे शक्ति और धन की प्रतिमााएं
अन्न संकट से जूझ रही काया
तराश रही संकट मोचन की काया
जमाने की दुत्कार झेलता हुनर
पत्थरों को दे रहा पूज्य आकार
हो गई हैं तैयार मूर्तियाँ
सज गई हैं वे सड़क के किनारे
रोजी रोटी मिलेगी इनके सहारे
जिनकी होगी भव्य प्राण प्रतिष्ठा
उधर, तंबू के पीछे आश्रम में
उच्च तकनीक से हुए हैं तैयारअत्याधुनिक
स्वार्थी बाबा
सभा में कृपा की कर रहे बौछार
कचौड़ी पकौड़ी चटनी खिला कर
दिव्य शक्ति का सपना दिखा कर
जेब पर डाल रहे हैं डाका
लूटखसोट का छोड़ते नहीं हैं मौका
तंबू के सामने जब गुजरा
स्वार्थी बाबाओं का काफिला
तब भूखे इंसानों का परिवार
दुबक गया एक किनारे
पाखंडियों का प्रपंच देख कर
दुखी हो गया शिल्पकार परिवार
मासूम बेटी ने पिता से पूछा -
इनको किसने बनाया?
पिता ने रूंधे स्वर में जवाब दिया -
इन्हें अंधभक्तों ने बनाया है
इनका ह्रदय पत्थर का है !
@ दिनेश ठक्कर बापा
(चित्र : गूगल से साभार)
तब भूखे इंसानों का परिवार
दुबक गया एक किनारे
पाखंडियों का प्रपंच देख कर
दुखी हो गया शिल्पकार परिवार
मासूम बेटी ने पिता से पूछा -
इनको किसने बनाया?
पिता ने रूंधे स्वर में जवाब दिया -
इन्हें अंधभक्तों ने बनाया है
इनका ह्रदय पत्थर का है !
@ दिनेश ठक्कर बापा
(चित्र : गूगल से साभार)
सोमवार, 10 अगस्त 2015
टोपीधर भुजंगराज
लोकतंत्र के चंदन वन से कूच कर
टोपीधर भुजंगराज
अंध भक्तों की बस्ती में आ गए हैं
वे फन उठाए हुए हैं
उन्हें तुमसे
तुम्हें उनसे
परस्पर खतरा है
उन्होंने खतरा भांप लिया है
तुम्हें भी ज्ञान चक्षु खोलना होगा
उनसे ज्यादा सतर्क रहना होगा
तुम्हें भी अब सिर उठाना होगा
हाथ जोड़ना
फूल चढ़ाना
दूध पिलाना
बीन बजाना
मिथकीय मूर्खता बंद करना होगा
अंध विश्वास छोड़ना होगा
अन्यथा डंस लिए जाओगे
उनके जहर की मारकता समझना
अपने खून को नीला न होने देना
जिंदा इंसान की तरह ही जीना
अपने सोए जमीर को जगाओ
भीतर की आग को बाहर लाओ
फिर तुम देखना
जन आक्रोश की आग से डर कर
डराने वाले फन समेट कर
कैसे सरपट भाग कर
चूहे के बिल में छिप जाएंगे
टोपीधर भुजंगराज !
@ दिनेश ठक्कर बापा
(चित्र : गूगल से साभार)
टोपीधर भुजंगराज
अंध भक्तों की बस्ती में आ गए हैं
वे फन उठाए हुए हैं
उन्हें तुमसे
तुम्हें उनसे
परस्पर खतरा है
उन्होंने खतरा भांप लिया है
तुम्हें भी ज्ञान चक्षु खोलना होगा
उनसे ज्यादा सतर्क रहना होगा
तुम्हें भी अब सिर उठाना होगा
हाथ जोड़ना
फूल चढ़ाना
दूध पिलाना
बीन बजाना
मिथकीय मूर्खता बंद करना होगा
अंध विश्वास छोड़ना होगा
अन्यथा डंस लिए जाओगेउनके जहर की मारकता समझना
अपने खून को नीला न होने देना
जिंदा इंसान की तरह ही जीना
अपने सोए जमीर को जगाओ
भीतर की आग को बाहर लाओ
फिर तुम देखना
जन आक्रोश की आग से डर कर
डराने वाले फन समेट कर
कैसे सरपट भाग कर
चूहे के बिल में छिप जाएंगे
टोपीधर भुजंगराज !
@ दिनेश ठक्कर बापा
(चित्र : गूगल से साभार)
रविवार, 2 अगस्त 2015
सफेदपोश
सफेदपोश अपने चेहरे में
सभी कालिख छिपा लेते
सफेद उजले परिधानों में
काले कारनामे ढक लेते
काली करतूतों की देह में
बेईमानी की दुर्गंध दबा लेते
अमीरी की नकली सुगंध से
गरीबी की नाक में दम करते
काले धन से भरी तिजोरी में
ईमान और शर्म भी रख देते
संरक्षकों की कृपा के फेर में
सुरा-सुंदरी भी मुहैया कराते
मद्य निषेध और बेटी बचाने
छलावा मात्र सदैव आगे रहते
राक्षसी प्रवृत्ति से धनी बन कर
दैविक कार्यों का दिखावा करते
समाज की आंखों में धूल झोंकते
अपने काले धन को सफेद करने
सामजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि करने
आड़े तिरछे हर हथकंडे अपनाते
मर्यादा की लक्ष्मण रेखा लांघते
कोई कसर वे बाकी नहीं रखते
प्रपंच के सभी सफेदपोश नुसखे
इनके काले धंधे से ही निकले है
सफेदपोशों के मुखौटे उतारने होंगे
असली चेहरे अनावृत्त करने होंगे
इनके काले धंधे उजागर करने होंगे
समय रहते इनके कुचक्र रोकने होंगे
@ दिनेश ठक्कर "बापा"
(चित्र : गूगल से साभार)
सभी कालिख छिपा लेते
सफेद उजले परिधानों में
काले कारनामे ढक लेते
काली करतूतों की देह में
बेईमानी की दुर्गंध दबा लेते
अमीरी की नकली सुगंध से
गरीबी की नाक में दम करते
काले धन से भरी तिजोरी में
ईमान और शर्म भी रख देते
संरक्षकों की कृपा के फेर में
सुरा-सुंदरी भी मुहैया कराते
मद्य निषेध और बेटी बचाने छलावा मात्र सदैव आगे रहते
राक्षसी प्रवृत्ति से धनी बन कर
दैविक कार्यों का दिखावा करते
समाज की आंखों में धूल झोंकते
अपने काले धन को सफेद करने
सामजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि करने
आड़े तिरछे हर हथकंडे अपनाते
मर्यादा की लक्ष्मण रेखा लांघते
कोई कसर वे बाकी नहीं रखते
प्रपंच के सभी सफेदपोश नुसखे इनके काले धंधे से ही निकले है
सफेदपोशों के मुखौटे उतारने होंगे
असली चेहरे अनावृत्त करने होंगे
इनके काले धंधे उजागर करने होंगे
समय रहते इनके कुचक्र रोकने होंगे
@ दिनेश ठक्कर "बापा"
(चित्र : गूगल से साभार)
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